सितम हैं क़हर हैं लौंडे शराब-ख़ाने के — मीर तक़ी मीर

सितम हैं क़हर हैं लौंडे शराब-ख़ाने के उतार लेते हैं अमामा हर नमाज़ी का

“The torment, the wrath of the boys in the tavern, Strip off the turban of every worshipper.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शराब-ख़ाने के लड़कों का सतावा और क्रोध इतना है कि वे हर नमाज़ पढ़ने वाले का पगड़ी उतार देते हैं।

विस्तार

यह शेर समाज के उस कड़वे सच को बयां करता है जहाँ दिखावा और असलियत में बहुत बड़ा अंतर है। शराब-ख़ाने के लड़के, जो बेपरवाह हैं, वे हर नमाज़ी के माथे से अमीमा उतार देते हैं। मिर्ज़ा साहब कहते हैं कि दुनिया का ये नज़ारा इतना व्यंग्यात्मक है कि धर्म और दुनिया की सीमाएँ मिट गई हैं। यह एक गहरा सामाजिक कटाक्ष है!

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