ग़ज़ल
रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
यह ग़ज़ल विरह और प्रेम की पीड़ा को व्यक्त करती है, जिसमें शायर अपने दिल में बसी यादों और दर्द को एक हुमा के रूप में चित्रित करता है। वह कहता है कि प्रेम की आग से कभी लापरवाह नहीं रह सकता, और वियोग की पीड़ा हर पल महसूस होती है।
गीत सुनें
1
रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
कुछ दर्द-ए-आशिक़ी का उसे भी मज़ा लगा
मेरे शरीर की जो ज्वाला है, उसे भी इश्क़ के दर्द का कुछ मज़ा आ गया।
2
ग़ाफ़िल न सोज़-ए-इश्क़ से रह फिर कबाब है
गर लाएहा उस आग का टक दिल को जा लगा
ग़ाफ़िल न सोज़-ए-इश्क़ से रह फिर कबाब है। अगर लाएहा उस आग का टक दिल को जा लगा। इसका शाब्दिक अर्थ है कि प्रेम की आग से लापरवाह मत रहो, क्योंकि अभी भी कबाब खाने को बाकी है; अगर उस आग को दिल में लाओगे, तो वह ज़रूर जल जाएगा।
3
देखा हमें जहाँ वो तहाँ आग हो गया
भड़का रखा है लोगों ने इस को लगा लगा
जहाँ भी हमने उसे देखा, वहाँ आग लग गई; लोगों ने इस बात को कहते हुए भड़का दिया, 'देखो, देखो।'
4
मोहलत तनिक भी हो तो सुख़न कुछ असर करे
मैं उठ गया कि ग़ैर तिरे कानों आ लगा
अगर थोड़ी देर और रुक जाती, तो आपकी बातों का मुझ पर असर होता; मैं जाग गया और देखा कि वे बातें मेरे कानों के लिए नहीं थीं।
5
अब आब-ए-चश्म ही है हमारा मुहीत-ए-ख़ल्क़
दरिया को हम ने कब का किनारे रखा लगा
अब हमारा प्रिय स्रोत केवल झरना ही रह गया है, जबकि हमने तो नदिया को कभी किनारे तक सीमित किया था।
6
हर-चंद उस की तेग़-ए-सितम थी बुलंद लेक
वो तौर बद हमें तो क़यामत भला लगा
शायर कह रहा है कि उसका सितम का बल चाँद और सूरज जैसा था, लेकिन जिस तरह से उसने हमारे साथ व्यवहार किया, वह तो कयामत जैसा था।
7
मज्लिस में उस की बार न मुझ को मिली कभू
दरवाज़े ही से गरचे बहुत मैं रहा लगा
मज्लिस में उस की नज़र मुझ पर कभी नहीं पड़ी, हालाँकि मैं बहुत कुछ कहने को तैयार था, पर मैं दरवाज़े तक ही सीमित रहा।
8
बोसा लबों का माँगते ही मुँह बिगड़ गया
क्या इतनी मेरी बात का तुम को बुरा लगा
होंठों पर चुंबन माँगते ही चेहरा बिगड़ गया, क्या मेरी बात से तुम्हें इतना बुरा लगा।
9
आलम की सैर 'मीर' की सोहबत में हो गई
तालेअ' से मेरे हाथ ये बे-दस्त-ओ-पा लगा
आलम की सैर 'मीर' की सोहबत में हो गई, तालेअ' से मेरे हाथ ये बे-दस्त-ओ-पा लगा। (अर्थ: दुनिया की यात्रा 'मीर' की संगत में पूरी हो गई, और 'तालेअ' से मेरे हाथ बेबस हो गए।)
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