मोहलत तनिक भी हो तो सुख़न कुछ असर करे — मीर तक़ी मीर
“If there were even a moment's delay, your words would have had an effect; I woke up and found that they were not for my ears.”
अर्थ
अगर थोड़ी देर और रुक जाती, तो आपकी बातों का मुझ पर असर होता; मैं जाग गया और देखा कि वे बातें मेरे कानों के लिए नहीं थीं।
विस्तार
यह शेर उस बेचैनी को बयां करता है जब आशिक़ को अपने महबूब की ज़रूरत होती है, लेकिन साथ ही उसे यह डर भी रहता है कि कहीं उसका ध्यान कहीं और न भटक जाए। शायर कह रहे हैं कि थोड़ी सी भी बात से मेरा दिल बहल जाता है.... लेकिन जैसे ही मैं कुछ करने की कोशिश करता हूँ, मुझे लगता है कि मेरा महबूब का ध्यान किसी और की बातों में लग गया है। यह सिर्फ़ दूरी का दर्द नहीं है, यह महबूब के साथ अकेलेपन का एहसास है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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