मज्लिस में उस की बार न मुझ को मिली कभू — मीर तक़ी मीर

मज्लिस में उस की बार न मुझ को मिली कभू दरवाज़े ही से गरचे बहुत मैं रहा लगा

“In the gathering, never did I receive a glance from her, Though I spoke greatly, I remained confined to the doorway.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मज्लिस में उस की नज़र मुझ पर कभी नहीं पड़ी, हालाँकि मैं बहुत कुछ कहने को तैयार था, पर मैं दरवाज़े तक ही सीमित रहा।

विस्तार

यह शेर इंतज़ार के गहरे दर्द और छूटे हुए रिश्ते की पीड़ा को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि वो महफ़िल के दरवाज़े पर बहुत इंतज़ार करते रहे, लेकिन उस महफ़िल के अंदर, उस के क़रीब, उन्हें कभी कोई वस्ल नसीब नहीं हुआ। यह उस बेचैनी को बयां करता है जब आप बहुत नज़दीक होते हैं, मगर फिर भी दूर ही रह जाते हैं।

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