रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा — मीर तक़ी मीर
रहता है हड्डियों से मिरी जो हुमा लगा
कुछ दर्द-ए-आशिक़ी का उसे भी मज़ा लगा
“The flame of my bones that dwells within me, Even to him, the pain of love, brought pleasure.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरे शरीर की जो ज्वाला है, उसे भी इश्क़ के दर्द का कुछ मज़ा आ गया।
विस्तार
ये शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने दर्द की एक बहुत गहरी बात कही है। शायर कहते हैं कि इश्क़ का दर्द, जो रूह में बसता है, वह हड्डियों से जुड़ा हुआ है। और कमाल की बात ये है कि माशूक़ (प्रेमी) को भी इस दर्द में एक अजीब सा मज़ा आ जाता है! यह दिखाता है कि इश्क़ में दर्द ही एक तरह की आदत बन जाता है।
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