बोसा लबों का माँगते ही मुँह बिगड़ गया — मीर तक़ी मीर
बोसा लबों का माँगते ही मुँह बिगड़ गया
क्या इतनी मेरी बात का तुम को बुरा लगा
“Just asking for a touch of red on the lips, why did your face sour? Did you find my mere words so objectionable?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
होंठों पर चुंबन माँगते ही चेहरा बिगड़ गया, क्या मेरी बात से तुम्हें इतना बुरा लगा।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस दर्द को बयां करता है, जब महबूब का रूठ जाना बहुत तकलीफ देता है। शायर पूछते हैं कि क्या इतनी सी बात... मेरे होंठों पर बस एक चुम्बन माँगने की... आपको इतना बुरा लगा? यह सवाल सिर्फ़ महबूब के चेहरे के बदलने पर नहीं, बल्कि प्यार की नाजुकता पर सवाल उठाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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