आलम की सैर 'मीर' की सोहबत में हो गई — मीर तक़ी मीर
“A journey through the world was completed in the company of 'Mir', My hands became helpless, detached from the 'Tale' (door/gate).”
अर्थ
आलम की सैर 'मीर' की सोहबत में हो गई, तालेअ' से मेरे हाथ ये बे-दस्त-ओ-पा लगा। (अर्थ: दुनिया की यात्रा 'मीर' की संगत में पूरी हो गई, और 'तालेअ' से मेरे हाथ बेबस हो गए।)
विस्तार
यह शेर बताता है कि किसी महान शख़्सियत की महफ़िल या याद का असर कितना गहरा होता है। शायर कहते हैं कि मेरा ये पूरा जहाँ, मेरी ये ज़िंदगी, सिर्फ़ 'मीर' की संगत में गुज़री है। और अचानक... मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे हाथ-पैर, मेरी ताक़त... सब छिन गए हैं। यह किसी गहरे भावनात्मक जुड़ाव या कला के प्रभाव को बयां करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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