ग़ज़ल
ख़ुश-क़दाँ जब सवार होते हैं
ख़ुश-क़दाँ जब सवार होते हैं
यह ग़ज़ल किसी प्रिय व्यक्ति के मोहक सौंदर्य और उसके साथ बिताए गए समय की यादों को समर्पित है। कवि कहता है कि जब वह व्यक्ति अपने सुंदर रूप में आता है, तो उसके सौंदर्य का वर्णन करना कठिन होता है, और ये यादें मन को मोह लेती हैं। यह ग़ज़ल प्रेम की गहराई और यादों के प्रभाव को दर्शाती है।
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1
ख़ुश-क़दाँ जब सवार होते हैं
सर्व-ओ-क़ुमरी शिकार होते हैं
जब सुंदर-मुख वाले सवार होते हैं, तो वे सर्वत्र चंद्रमा की तरह शिकार करते हैं।
2
तेरे बालों के वस्फ़ में मेरे
शे'र सब पेचदार होते हैं
तुम्हारे बालों की सुंदरता के वश में, मेरे शायरी के सभी शेर जटिल और पेचीदा होते हैं।
3
आओ याद-ए-बुताँ प भूल न जाओ
ये तग़ाफ़ुल-शिआर होते हैं
आओ याद-ए-बुताँ पर भूल न जाओ, ये तग़ाफ़ुल-शिक़र होते हैं। (अर्थ: आओ, प्रिय के स्मरण को मत भूलना; ये लापरवाही के शाइर हैं।)
4
देख लेवेंगे ग़ैर को तुझ पास
सोहबतों में भी यार होते हैं
अर्थात्, हम तेरे पास किसी बाहरी या अपरिचित व्यक्ति को देख लेंगे, क्योंकि महफ़िल या संगत में भी सच्चे दोस्त मौजूद होते हैं।
5
सदक़े हो लेवें एक-दम तेरे
फिर तो तुझ पर निसार होते हैं
अगर मैं तुमसे बस एक पल के लिए मिल पाऊं, तो मेरा दिल पूरी तरह से तुम पर न्योछावर हो जाएगा।
6
तू करे है क़रार मिलने का
हम अभी बे-क़रार होते हैं
तू (तुम) जब क़रार मिलने का करता है, तो हम अभी भी बेचैन (बे-क़रार) होते हैं।
7
हफ़्त-इक़्लीम हर गली है कहीं
दिल्ली से भी दयार होते हैं
हर गली, हर कोने में, वह सात देशों की भूमि है। यहाँ तक कि दिल्ली से भी कृपा और दया के स्थान मिलते हैं।
8
रफ़्ता रफ़्ता ये तिफ़्ल-ए-ख़ुश-ज़ाहिर
फ़ित्ना-ए-रोज़गार होते हैं
धीरे-धीरे, यह बाहरी रूप से सुंदर बच्चा रोज़गार का प्रलोभन बनता जाता है।
9
उस के नज़दीक कुछ नहीं इज़्ज़त
'मीर'-जी यूँ ही ख़्वार होते हैं
उसके नज़दीक कोई इज़्ज़त नहीं है; मीर जी, यूँ ही ख़्वार होते हैं।
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