उस के नज़दीक कुछ नहीं इज़्ज़त — मीर तक़ी मीर

उस के नज़दीक कुछ नहीं इज़्ज़त 'मीर'-जी यूँ ही ख़्वार होते हैं

“Near him, there is no honor; 'Mir'-ji, how easily one is disgraced.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उसके नज़दीक कोई इज़्ज़त नहीं है; मीर जी, यूँ ही ख़्वार होते हैं।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस कड़वी हकीकत को बयान करता है, जहाँ मोहब्बत की आग में इंसान अपनी इज़्ज़त को भी दांव पर लगा देता है। मीर साहब कहते हैं कि महबूब के नज़दीक, या किसी गहरे रिश्ते में, इज़्ज़त का कोई मोल नहीं रह जाता। यह एक गहरा दर्द है... कि प्यार के सामने इंसान अपनी आत्म-गरिमा को भी कुर्बान कर देता है।

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