आओ याद-ए-बुताँ प भूल न जाओ — मीर तक़ी मीर

आओ याद-ए-बुताँ प भूल न जाओ ये तग़ाफ़ुल-शिआर होते हैं

“Come, do not forget the memory of the beloved; these are the verses of negligence.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

आओ याद-ए-बुताँ पर भूल न जाओ, ये तग़ाफ़ुल-शिक़र होते हैं। (अर्थ: आओ, प्रिय के स्मरण को मत भूलना; ये लापरवाही के शाइर हैं।)

विस्तार

Mir Taqi Mir साहब यहां यादों की गहराई को समझा रहे हैं। वो कहते हैं कि दिल से जुड़ी यादों, खासकर प्यार की यादों को कभी नहीं भूलना चाहिए। यह शेर कहता है कि जो हमें भुलाने की कोशिश लगती है, वह दरअसल शायर के अपने मन का एक भ्रम होता है। इसका मतलब है कि कुछ एहसास इतने गहरे होते हैं कि उन्हें मिटाना नामुमकिन है। यह याद दिलाता है कि यादें हमेशा हमारे साथ रहती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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