ग़ज़ल

सभी अंदाज़-ए-हुस्न प्यारे हैं

سبھی انداز حسن پیارے ہیں
जिगर मुरादाबादी· Ghazal· 9 shers· radif: हैं

यह ग़ज़ल हुस्न के तमाम अंदाज़ों में ख़ास तौर पर सादगी के आकर्षण और प्रेम की विवशता को दर्शाती है। इसमें दिन के हँसते-मुस्कुराते पलों के पीछे रात की तन्हाई और अंतर्मन के गहरे दर्द का मार्मिक चित्रण किया गया है।

Source: rekhta · HI

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शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
सभी अंदाज़-ए-हुस्न प्यारे हैं हम मगर सादगी के मारे हैं
सुंदरता के सारे अंदाज़ प्यारे और दिलकश हैं, लेकिन हम तो केवल सादगी के दीवाने और कायल हैं।
2
उस की रातों का इंतिक़ाम न पूछ जिस ने हँस हँस के दिन गुज़ारे हैं
उस व्यक्ति की रातों के इंतिक़ाम या दर्द के बारे में मत पूछो, जिसने अपने दिन हँस-हँसकर गुज़ारे हैं।
3
ऐ सहारों की ज़िंदगी वालो कितने इंसान बे-सहारे हैं
ऐ सहारों और सुविधाओं से भरी ज़िंदगी जीने वालो, ज़रा देखो कि दुनिया में कितने लोग बिल्कुल बेसहारा और लाचार हैं।
4
लाला-ओ-गुल से तुझ को क्या निस्बत ना-मुकम्मल से इस्तिआ'रे हैं
तुम्हारा लाला और गुलाब से क्या मुक़ाबला? वे तो तुम्हारी सुंदरता को बयां करने के लिए महज़ अधूरे रूपक (इस्तिआरे) हैं।
5
हम तो अब डूब कर ही उभरेंगे वो रहें शाद जो किनारे हैं
हम तो अब पूरी तरह डूबने के बाद ही ऊपर उठेंगे, जबकि जो लोग किनारे पर सुरक्षित हैं वे खुश रहें।
6
शब-ए-फ़ुर्क़त भी जगमगा उट्ठी अश्क-ए-ग़म हैं कि माह-पारे हैं
जुदाई की रात भी चमक उठी है; ये ग़म के आँसू बह रहे हैं या चाँद के टुकड़े बिखर गए हैं?
7
आतिश-ए-इश्क़ वो जहन्नम है जिस में फ़िरदौस के नज़ारे हैं
इश्क़ की आग ऐसा जहन्नम (नरक) है, जिसमें जन्नत (स्वर्ग) के खूबसूरत नज़ारे दिखाई देते हैं।
8
वो हमीं हैं कि जिन के हाथों ने गेसू-ए-ज़िंदगी सँवारे हैं
हम ही वे लोग हैं जिनके हाथों ने ज़िंदगी की ज़ुल्फ़ों को सँवारा और बेहतर बनाया है।
9
हुस्न की बे-नियाज़ियों पे न जा बे-इशारे भी कुछ इशारे हैं
महबूब की बेरुखी और बेपरवाही पर मत जाओ, क्योंकि कभी-कभी कोई इशारा न करना भी अपने आप में एक इशारा होता है।
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