हुस्न की बे-नियाज़ियों पे न जा — जिगर मुरादाबादी

हुस्न की बे-नियाज़ियों पे न जा बे-इशारे भी कुछ इशारे हैं

“Be not deceived by Beauty's aloof disdain; even in the lack of gestures, subtle signs remain.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

महबूब की बेरुखी और बेपरवाही पर मत जाओ, क्योंकि कभी-कभी कोई इशारा न करना भी अपने आप में एक इशारा होता है।

विस्तार

महबूब की बेरुखी और बेपरवाही को दिल पर मत लीजिए, क्योंकि इश्क़ की इस अदा में भी एक गहरा राज़ छुपा होता है। कभी-कभी किसी का जानबूझकर नज़रअंदाज़ करना और खामोश रहना ही उसकी सबसे बड़ी तवज्जो होती है। शायर बड़े प्यार से समझाते हैं कि उनका कोई इशारा न करना भी दरअसल मोहब्बत का एक ख़ामोश इशारा ही है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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