वो हमीं हैं कि जिन के हाथों ने — जिगर मुरादाबादी
“It is we alone whose devoted hands have gently groomed the flowing tresses of life.”
अर्थ
हम ही वे लोग हैं जिनके हाथों ने ज़िंदगी की ज़ुल्फ़ों को सँवारा और बेहतर बनाया है।
विस्तार
इस ख़ूबसूरत शेर में ज़िंदगी की उलझनों को बिखरी हुई ज़ुल्फ़ों यानी 'गेसू-ए-ज़िंदगी' की तरह देखा गया है। शायर बड़े फ़ख़्र और अपनेपन से कहता है कि यह आम इंसानों की मेहनत, मोहब्बत और हौसले का असर है जिसने इस बिखरी हुई दुनिया को सँवारकर जीने लायक बनाया। यह उन सभी संवेदनशील हाथों और दिलों को एक भावुक सलाम है जो अपनी कुर्बानियों से ज़िंदगी के हुस्न को निखारते हैं।
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