ग़ज़ल

ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं

زاہد نہ کہہ بری کہ یہ مستانے آدمی ہیں
दाग़ देहलवी· Ghazal· 11 shers· radif: आदमी हैं

इस ग़ज़ल में शायर ज़ाहिद की संकीर्णता पर तंज़ कसते हुए मस्त और बेपरवाह लोगों की सच्चाई का बचाव करता है। यह रचना एक चुटीले और दार्शनिक अंदाज़ में मानवीय स्वभाव की जटिलताओं, दिखावे की नैतिकता और प्रेम के उन्माद को दर्शाती है।

Source: rekhta · HI

गीत सुनें

शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं तुझ को लिपट पड़ेंगे दीवाने आदमी हैं
हे ज़ाहिद! इन मस्त लोगों को बुरा मत कह, क्योंकि ये दीवाने इंसान हैं और तुझसे ही लिपट पड़ेंगे।
2
ग़ैरों की दोस्ती पर क्यूँ ए'तिबार कीजे ये दुश्मनी करेंगे बेगाने आदमी हैं
पराए लोगों की दोस्ती पर क्यों भरोसा किया जाए? वे तो आगे चलकर दुश्मनी ही करेंगे क्योंकि वे अपने नहीं हैं।
3
जो आदमी पे गुज़री वो इक सिवा तुम्हारे क्या जी लगा के सुनते अफ़्साने आदमी हैं
सिर्फ तुम्हें छोड़कर, इंसान पर जो कुछ भी बीती है उसकी दास्तान को लोग कितने ध्यान और चाव से सुनते हैं।
4
क्या जुरअतें जो हम को दरबाँ तुम्हारा टोके कह दो कि ये तो जाने-पहचाने आदमी हैं
तुम्हारे दरबान की यह हिम्मत कैसे हुई कि वह मुझे रोके? उससे कह दो कि यह तो जाने-पहचाने आदमी हैं।
5
मय बूँद भर पिला कर क्या हँस रहा है साक़ी भर भर के पीते आख़िर पैमाने आदमी हैं
हे साक़ी, सिर्फ़ एक बूँद शराब पिलाकर तू क्यों हँस रहा है? आख़िरकार इंसान ही तो लबालब भरे हुए पैमाने पीते हैं।
6
तुम ने हमारे दिल में घर कर लिया तो क्या है आबाद करते आख़िर वीराने आदमी हैं
अगर तुमने हमारे दिल में घर बना भी लिया तो इसमें क्या बड़ी बात है? आखिरकार इंसान ही तो वीरान जगहों को आबाद करते हैं।
7
नासेह से कोई कह दे कीजे कलाम ऐसा हज़रत को ता कि कोई ये जाने आदमी हैं
कोई उपदेशक से कह दे कि वह इस तरह से बात करे ताकि लोग समझ सकें कि वह भी एक इंसान ही है।
8
जब दावर-ए-क़यामत पूछेगा तुम पे रख कर कह देंगे साफ़ हम तो बेगाने आदमी हैं
जब क़यामत के दिन इंसाफ़ करने वाला ख़ुदा तुम्हारे हवाले से सवाल करेगा, तो हम साफ़-साफ़ कह देंगे कि हम तो बिल्कुल अजनबी इंसान हैं।
9
मैं वो बशर कि मुझ से हर आदमी को नफ़रत तुम शम्अ वो कि तुम पर परवाने आदमी हैं
मैं ऐसा इंसान हूँ जिससे हर कोई नफ़रत करता है, जबकि तुम ऐसी शमा हो जिस पर लोग परवानों की तरह फिदा होते हैं।
10
महफ़िल भरी हुई है सौदाइयों से उस की उस ग़ैरत-ए-परी पर दीवाने आदमी हैं
उसकी महफ़िल उसके चाहने वालों से भरी हुई है, क्योंकि परियों को भी लजाने वाली उस सुंदरी पर लोग दीवाने हो चुके हैं।
11
शाबाश 'दाग़' तुझ को क्या तेग़-ए-इश्क़ खाई जी करते हैं वही जो मर्दाने आदमी हैं
शाबाश दाग़, तुमने इश्क़ की तलवार का वार क्या ख़ूब झेला है; ऐसा साहस और हौसला सिर्फ़ वही दिखाते हैं जो सचमुच बहादुर मर्द होते हैं।
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