ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं — दाग़ देहलवी

ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं तुझ को लिपट पड़ेंगे दीवाने आदमी हैं

“Speak no ill of them, O pious preacher, for intoxicated men are they; They will wrap you in wild embrace—utterly madmen are they!”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

हे ज़ाहिद! इन मस्त लोगों को बुरा मत कह, क्योंकि ये दीवाने इंसान हैं और तुझसे ही लिपट पड़ेंगे।

विस्तार

इस शेर में शायर बड़ी नज़ाकत और मज़ाकिया अंदाज़ में जाहिद यानी धर्मोपदेशक को खबरदार करता है कि इन प्रेम-मस्तों को बुरा-भला मत कहो। ये पाबंदियों और दिखावे से परे दीवाने लोग हैं, जो नफ़रत का जवाब भी बेपनाह मुहब्बत से देंगे और झूमते हुए तुम्हें ही गले लगा लेंगे। यह सूखी धार्मिक कठोरता पर मस्तमौला इश्क़ की एक बहुत प्यारी और हल्की-फुल्की चोट है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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