मय बूँद भर पिला कर क्या हँस रहा है साक़ी — दाग़ देहलवी

मय बूँद भर पिला कर क्या हँस रहा है साक़ी भर भर के पीते आख़िर पैमाने आदमी हैं

“Why do you laugh, O cupbearer, serving but a single drop of wine? After all, it is mortals who drink goblets brimming to the brim.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

हे साक़ी, सिर्फ़ एक बूँद शराब पिलाकर तू क्यों हँस रहा है? आख़िरकार इंसान ही तो लबालब भरे हुए पैमाने पीते हैं।

विस्तार

शायर यहाँ साक़ी के कंजूसी भरे अंदाज़ पर एक मीठा सा शिकवा कर रहा है, जो सिर्फ़ एक बूँद शराब देकर मुस्कुरा रहा है। वह साक़ी को इंसानी हौसले और उसकी असीमित प्यास की याद दिलाता है कि आख़िर इंसान ही तो वो है जो ग़म और इश्क़ के लबालब भरे प्याले एक घूंट में पी जाता है। यह शेर ज़िंदगी की उस गहरी प्यास को बयान करता है, जिसे महज़ कुछ कतरों से नहीं बुझाया जा सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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