मैं वो बशर कि मुझ से हर आदमी को नफ़रत — दाग़ देहलवी

मैं वो बशर कि मुझ से हर आदमी को नफ़रत तुम शम्अ वो कि तुम पर परवाने आदमी हैं

“I am that mortal whom every person shuns with bitter hate, while you are such a radiant flame that mankind swarms around you like moths.”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

मैं ऐसा इंसान हूँ जिससे हर कोई नफ़रत करता है, जबकि तुम ऐसी शमा हो जिस पर लोग परवानों की तरह फिदा होते हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर ने अपने अकेलेपन और महबूब की बेपनाह लोकप्रियता के बीच एक गहरा फ़र्क दिखाया है। वह खुद को एक ऐसा बदनसीब इंसान समझता है जिससे जमाना नफ़रत या बेरुखी बरतता है, जबकि महबूब वह रौशन शमा है जिस पर पूरी दुनिया परवानों की तरह जान छिड़कने को तैयार रहती है। यह शेर उस दर्द को बखूबी छूता है जहाँ इंसान अपनी मुकम्मल तन्हाई को महबूब की पुरकशिश दुनिया के सामने बेबस पाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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