जो आदमी पे गुज़री वो इक सिवा तुम्हारे — दाग़ देहलवी
“Save for you alone, look with what rapt attention men listen to the tales of all that man has suffered!”
अर्थ
सिर्फ तुम्हें छोड़कर, इंसान पर जो कुछ भी बीती है उसकी दास्तान को लोग कितने ध्यान और चाव से सुनते हैं।
विस्तार
शायर यहाँ एक बहुत ही चुभती हुई सच्चाई बयां कर रहे हैं कि दुनिया भर के लोग दूसरों के दर्द और दास्तानों को बड़े चाव से 'क़िस्सा' समझकर सुनते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जिस एक इंसान यानी महबूब से सच्ची हमदर्दी की आस थी, बस वही बेपरवाह और बेख़बर रहा। यह शेर इंसानी समाज के तमाशबीन रवैये और महबूब की बेरुखी के बीच तड़पते दिल की तन्हाई को बयां करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
