क्या जुरअतें जो हम को दरबाँ तुम्हारा टोके — दाग़ देहलवी

क्या जुरअतें जो हम को दरबाँ तुम्हारा टोके कह दो कि ये तो जाने-पहचाने आदमी हैं

“What audacity does your gatekeeper have to bar my way? Just tell him, 'Let him in, he is a familiar face.'”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

तुम्हारे दरबान की यह हिम्मत कैसे हुई कि वह मुझे रोके? उससे कह दो कि यह तो जाने-पहचाने आदमी हैं।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ का नाज़ और एक मीठा सा हक़ दोनों साथ-साथ छलकते हैं। महबूब की चौखट पर दरबान का रोकना पुरानी रवायत है, लेकिन आशिक़ बड़ी मासूमियत से कहता है कि कम से कम मुझे अजनबियों की तरह तो मत रोकिए। यह सिर्फ़ दरवाज़े की बात नहीं, बल्कि दिल के उस पुराने रिश्ते की पुकार है जो महबूब से अपने जाने-पहचाने होने की तस्दीक़ माँगता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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