ग़ज़ल

देखकर गिरती गले में सब्ज़ धानी आप की

دیکھکر گرتی گلیمین سبز دھانی آپ کی

Source: Kulliyaat-e-Nazeer Akbarabadi (1922) · HI

गीत सुनें

शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
देखकर गिरती गले में सब्ज़ धानी आप की धान के भी खेत ने आपान मानी आप की
आपके गले में हरी-सुनहरी धानी चुनरी को ढलकते देखकर, धान के खेत ने भी स्वीकार कर लिया कि वह आपके सामने हार गया।
2
क्या तअज्जुब हो अगर देखे तो मुर्दा जी उठे चीन नेफ़े की डुमक पेड़ू पे आनी आप की
इसमें क्या अचरज कि मुर्दा भी जी उठे, जब तुम्हारी नाभि के नीचे पेट पर कमरबंद की वह सलवट और उभार दिखाई दे।
3
हो तो क्या हैं दिल फ़रिश्ते का भी काफ़िर छीन ले टुक छमक खुल के फिर अंगिया पे छाती आप की
फ़रिश्ते का दिल भी हो तो क्या, वह काफ़िर उसे भी छीन ले; जब आप ज़रा इठलाकर खुल जाएँ और अंगिया पर आपकी छाती झलक उठे।
4
आ पड़े दो सौ बरस के मुर्दा-ए-बेजान में जान जिसके ऊपर दो घड़ी हो मेहरबानी आप की
दो सौ साल के बेजान मुर्दे में भी जान आ पड़े, जिस पर दो घड़ी के लिए आपकी मेहरबानी हो जाए।
5
इक लपट कुश्ती की हमसे भी तो कर देखो ज़रा हां भला हम भी तो जानें पहलवानी आप की
ज़रा हमसे भी कुश्ती का एक दांव लगाकर देखो, ताकि हम भी तुम्हारी पहलवानी को जान-परख सकें।
6
देखो कहना मानो मत ख़ाली सलाई से रखो वर्ना कोसेगी हमें ये सुरमा-दानी आप की
देखो, मेरी बात मानो, सलाई को ख़ाली यानी बिना सुरमे के मत रखो, वरना तुम्हारी यह सुरमेदानी हमें कोसेगी।
7
छल्ले ग़ैरों पास तो वो ख़ातम ज़रा-ए-निगार है हमारे पास भी अबतक निशानी आप की
अगर वह नक़्श वाली अँगूठी गैरों के पास चली गई है, तो मेरे पास भी अब तक आपकी एक निशानी बाक़ी है।
8
वक़्त तो जाता रहा पर बात बाक़ी रह गई है ये छूटी दोस्ती अब हमने जानी आप की
वक़्त तो बीतता चला गया, पर बात अधूरी रह गई; इस टूटी हुई दोस्ती से अब हमें पता चला कि आप असल में कैसे हैं।
9
हमने भेजा तुमको तुम कहते हो यां पहुंचा नहीं खा गई शायद वो कुटनी मीर जानी आप की
मैंने तुम्हें भेज दिया था, पर तुम कहते हो कि यहाँ पहुँचा ही नहीं; शायद उस कुटनी ने, ऐ मीर, तुम्हारी जान ही खा ली।
10
एक शब ऐ जान-ए-जां घर में सहर बीजाईए हाल पर बंदे के होगी मेहरबानी आप की
ऐ मेरे प्राणों के प्राण, एक रात मेरे घर में सवेरा कीजिए; इस बंदे की दशा पर आपकी यही मेहरबानी होगी।
11
क्या अजब सूरत रक़ीब-ए-रू-सियह की देखकर ख़ौफ़ से हालत हुई हो पानी पानी आप की
क्या आश्चर्य कि उस काले मुँह वाले रक़ीब की सूरत देखकर, डर के मारे आपकी हालत पानी-पानी हो गई हो।
12
एक आलम कोहकन की तरह सर फोड़ेगा अब गर इसी सूरत रही शीरीं-ज़बानी आप की
अगर आपकी ज़बान की यह मिठास इसी तरह बनी रही, तो अब सारी दुनिया फ़रहाद की तरह पत्थर से अपना सिर फोड़ लेगी।
13
क्या हमें लगती हो प्यारी जब वो कहती हो नज़ीर हो मियां कुछ इन दिनों ना-मेहरबानी आप की
ऐ नज़ीर, जब वो यह कहती हो कि इन दिनों तुम कुछ नामेहरबान हो, तो वही बात हमें प्यारी लगती है।
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