क्या हमें लगती हो प्यारी जब वो कहती हो नज़ीर — नज़ीर अकबराबादी

क्या हमें लगती हो प्यारी जब वो कहती हो नज़ीर हो मियां कुछ इन दिनों ना-मेहरबानी आप की

“How dear you seem to us, Nazeer, when thus you say to me, "These days, my friend, it seems you show no kindness unto me."”

— नज़ीर अकबराबादी

अर्थ

ऐ नज़ीर, जब वो यह कहती हो कि इन दिनों तुम कुछ नामेहरबान हो, तो वही बात हमें प्यारी लगती है।

विस्तार

इस शेर में शायर नज़ीर अपनी महबूबा के साथ एक प्यारा-सा, नटखट पल बाँट रहे हैं। वो प्यार से उलाहना देती हैं, "अरे मियां, इन दिनों तो आप कुछ बेरुख़ से हो गए हो मेरे साथ।" और ठीक उसी घड़ी वो शायर को कितनी प्यारी लगती हैं! उनकी यह नरम शिकायत, यह शरारती इल्ज़ाम कि आप बेपरवाह हो गए हैं, उन्हें और भी हसीन बना देता है। इस छोटी-सी तकरार में कितनी कोमलता छिपी है। कभी-कभी मुहब्बत बड़ी-बड़ी बातों में नहीं, बल्कि इन मीठे उलाहनों में झलकती है, जब कोई आपकी गर्मजोशी को याद करके शिकवा करता है। शायर को उनकी महबूबा उसी पल सबसे ज़्यादा भाती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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