आ पड़े दो सौ बरस के मुर्दा-ए-बेजान में जान — नज़ीर अकबराबादी
“Into a lifeless corpse of two hundred years, life would come pouring back, upon whom, for but two brief moments, your kindness chanced to fall.”
अर्थ
दो सौ साल के बेजान मुर्दे में भी जान आ पड़े, जिस पर दो घड़ी के लिए आपकी मेहरबानी हो जाए।
विस्तार
शायर अपने महबूब की मेहरबानी की ताक़त की तारीफ़ कर रहा है। वह कहता है कि दो सौ बरस से मरा हुआ, बेजान शरीर भी फिर से जी उठेगा, अगर सिर्फ़ दो पल के लिए आपकी कृपा उस पर पड़ जाए। यानी आपकी मेहरबानी में इतनी गर्मजोशी और जीवन देने वाली शक्ति है कि वह निराश को नई उम्मीद दे सकती है, थके हुए को जगा सकती है, और जो बिलकुल ख़त्म लगता हो उसमें भी जान डाल सकती है। यह कहने का एक ख़ूबसूरत तरीका है कि महबूब की एक नज़र-ए-करम किसी भी टूटे हुए दिल को फिर से ज़िंदा कर देती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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