ग़ज़ल
क्या तंग हम सितम-ज़दगाँ का जहान है
کیا تنگ ہم ستم زدگاں کا جہان ہے
इस ग़ज़ल में ग़ालिब ने पीड़ितों और व्यथित प्रेमियों के सीमित व संकीर्ण संसार का मार्मिक चित्रण किया है, जहाँ विशाल आकाश भी चींटी के अंडे जैसा तुच्छ प्रतीत होता है। इसके साथ ही वे ईश्वर अथवा प्रियतम की उस सर्वव्यापी सत्ता और ऊर्जा को रेखांकित करते हैं, जिससे संपूर्ण सृष्टि में गति और जीवन का संचार होता है।
Source: rekhta · HI
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1
क्या तंग हम सितम-ज़दगाँ का जहान है
जिस में कि एक बैज़ा-ए-मोर आसमान है
हम सताए हुए लोगों की दुनिया कितनी तंग और संकीर्ण है कि इसमें पूरा आसमान भी चींटी के एक अंडे जैसा मालूम होता है।
2
है काएनात को हरकत तेरे ज़ौक़ से
परतव से आफ़्ताब के ज़र्रे में जान है
यह पूरी सृष्टि तुम्हारी ही चाहत और रुचि से गतिशील है, ठीक वैसे ही जैसे सूरज की रोशनी पड़ने से धूल के एक छोटे से कण में भी जान आ जाती है।
3
हालाँकि है ये सीली-ए-ख़ारा से लाला रंग
ग़ाफ़िल को मेरे शीशे पे मय का गुमान है
हालाँकि पत्थर की चोट लगने से मेरा शीशा लाल रंग का हो गया है, फिर भी अनजान व्यक्ति को भ्रम है कि मेरे प्याले में शराब भरी हुई है।
4
की उस ने गर्म सीना-ए-अहल-ए-हवस में जा
आवे न क्यूँ पसंद कि ठंडा मकान है
उसने हवस के मारे लोगों के सीने में अपना ठिकाना बना लिया; भला वह जगह उसे पसंद क्यों न आती, आख़िर वह एक ठंडा मकान है।
5
क्या ख़ूब तुम ने ग़ैर को बोसा नहीं दिया
बस चुप रहो हमारे भी मुँह में ज़बान है
तुम बड़े आराम से कहते हो कि तुमने किसी गैर को नहीं चूमा; अब चुप रहो, हमारे मुँह में भी ज़बान है और हम भी सच कह सकते हैं।
6
बैठा है जो कि साया-ए-दीवार-ए-यार में
फ़रमाँ-रवा-ए-किश्वर-ए-हिन्दुस्तान है
जो व्यक्ति महबूब की दीवार के साए में बैठा है, वह मानो सारे हिंदुस्तान का शासक और बादशाह है।
7
हस्ती का ए'तिबार भी ग़म ने मिटा दिया
किस से कहूँ कि दाग़ जिगर का निशान है
ग़म ने मेरे वजूद का भरोसा भी मिटा दिया है; अब मैं किससे कहूँ कि यह दाग़ मेरे घायल जिगर की निशानी है।
8
है बारे ए'तिमाद-ए-वफ़ा-दारी इस क़दर
'ग़ालिब' हम इस में ख़ुश हैं कि ना-मेहरबान है
मेरी वफ़ादारी पर इस क़दर भरोसा है कि ऐ 'ग़ालिब', हम इसी बात से ख़ुश हैं कि महबूब हम पर बेरुख़ और ना-मेहरबान है।
9
देहली के रहने वालो 'असद' को सताओ मत
बे-चारा चंद रोज़ का याँ मेहमान है
ऐ दिल्ली के रहने वालो, असद को मत सताओ; वह लाचार इंसान यहाँ बस कुछ ही दिनों का मेहमान है।
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