है बारे ए'तिमाद-ए-वफ़ा-दारी इस क़दर 'ग़ालिब' हम इस में ख़ुश हैं कि ना-मेहरबान है

“Such absolute trust is reposed in my enduring fidelity; Ghalib, we rejoice that she remains unkind to me.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरी वफ़ादारी पर इस क़दर भरोसा है कि ऐ 'ग़ालिब', हम इसी बात से ख़ुश हैं कि महबूब हम पर बेरुख़ और ना-मेहरबान है।

विस्तार

इस शेर में ग़ालिब इश्क़ के एक बेहद दिलचस्प और मीठे तंज़ को पेश करते हैं। महबूब को आशिक़ की वफ़ादारी पर इतना पक्का भरोसा है कि उसे मनाने या उस पर प्यार लुटाने की ज़रूरत ही महसूस नहीं होती, वह जानता है कि आशिक़ उसे छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। ग़ालिब इस बेरुखी में भी मुस्कुरा लेते हैं, क्योंकि यह सितम असल में उनकी वफ़ा पर महबूब के अटूट यक़ीन का सबसे बड़ा सबूत है।

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