“The universe is stirred to motion by your passionate grace / In the radiance of the sun, life breathes in a speck of dust.”
यह पूरी सृष्टि तुम्हारी ही चाहत और रुचि से गतिशील है, ठीक वैसे ही जैसे सूरज की रोशनी पड़ने से धूल के एक छोटे से कण में भी जान आ जाती है।
इस शेर में शायर पूरी कायनात की धड़कन को महबूब (या ईश्वर) के 'ज़ौक़' यानी प्रेम और सृजन की उमंग से जोड़ता है। जैसे धूप की किरण पड़ते ही हवा में तैरता धूल का बेजान ज़र्रा भी चमक उठता है और ऐसा लगता है जैसे उसमें जान आ गई हो, ठीक वैसे ही महबूब के नूर से यह सारा आलम हरकत में है। यह शेर बड़ी सादगी से यह समझाता है कि प्रेम की छुअन के बिना यह दुनिया बेजान है, और उसका एक अक्स ही हर छोटी से छोटी चीज़ को ज़िंदगी बख्श देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
