ग़ज़ल

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

ساز یہ کینہ ساز کیا جانیں
दाग़ देहलवी· Ghazal· 9 shers· radif: क्या जानें

यह ग़ज़ल महबूब की बेरुखी और नाज़-नख़रों के मुक़ाबले आशिक़ के समर्पण और आत्मसमर्पण के दर्द को उजागर करती है। शायर का मानना है कि हुस्न और ग़ुरूर में डूबे लोग इश्क़ की पीड़ा, विनम्रता और सोज़-ओ-गुदाज़ की वास्तविक गहराई को कभी समझ नहीं सकते।

Source: rekhta · HI

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शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें नाज़ वाले नियाज़ क्या जानें
कपट और द्वेष रखने वाले लोग संगीत या प्रेम के साज़ को क्या समझें, और घमंड व नख़रे करने वाले लोग विनम्रता और समर्पण के भाव को क्या जानें।
2
शम्अ'-रू आप गो हुए लेकिन लुत्फ़-ए-सोज़-ओ-गुदाज़ क्या जानें
भले ही आपका चेहरा शमा की तरह चमकदार और सुंदर है, लेकिन आप प्रेम में जलने और पिघलने का आनंद क्या जानें?
3
कब किसी दर की जब्हा-साई की शैख़ साहब नमाज़ क्या जानें
शेख़ साहब ने कभी किसी की चौखट पर अपना माथा नहीं टेका, फिर वे नमाज़ की हक़ीक़त क्या जानें।
4
जो रह-ए-इश्क़ में क़दम रक्खें वो नशेब-ओ-फ़राज़ क्या जानें
जो लोग इश्क़ के रास्ते पर क़दम रखते हैं, वे उसके उतार-चढ़ाव की परवाह नहीं करते हैं।
5
पूछिए मय-कशों से लुत्फ़-ए-शराब ये मज़ा पाक-बाज़ क्या जानें
शराब का असली आनंद शराब पीने वालों से पूछिए, यह मज़ा पवित्र और परहेज़गार लोग क्या जानें।
6
बले चितवन तिरी ग़ज़ब री निगाह क्या करेंगे ये नाज़ क्या जानें
तुम्हारी तिरछी चितवन बेहद आकर्षक है और तुम्हारी निगाह क़हर बरपा करने वाली है; कौन जाने तुम्हारे ये नाज़-ओ-अंदाज़ क्या सितम ढाएंगे।
7
जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक वो मिरे दिल का राज़ क्या जानें
जिन्हें अब तक खुद अपनी ही कोई खबर नहीं है, वे मेरे दिल का भेद या राज़ क्या समझेंगे।
8
हज़रत-ए-ख़िज़्र जब शहीद न हों लुत्फ़-ए-उम्र-ए-दराज़ क्या जानें
जब हज़रत ख़िज़्र स्वयं कभी शहीद ही नहीं हुए, तो वे लंबी उम्र का वास्तविक आनंद क्या समझ सकते हैं?
9
जो गुज़रते हैं 'दाग़' पर सदमे आप बंदा-नवाज़ क्या जानें
दाग़ पर जो दुख और सदमे बीतते हैं, आप जैसे कृपालु और मेहरबान इंसान उन्हें भला क्या समझ सकते हैं।
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