साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें — दाग़ देहलवी

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें नाज़ वाले नियाज़ क्या जानें

“What could the malice-makers know of harmony's art? What can the haughty know of a supplicant's heart?”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

कपट और द्वेष रखने वाले लोग संगीत या प्रेम के साज़ को क्या समझें, और घमंड व नख़रे करने वाले लोग विनम्रता और समर्पण के भाव को क्या जानें।

विस्तार

यह शेर दिल की नज़ाकत और दुनिया के खोखलेपन के बीच का फ़र्क़ बड़ी ख़ूबसूरती से बयां करता है। शायर कहते हैं कि जिनके दिलों में सिर्फ़ नफ़रत और साज़िशें बसी हों, वो इश्क़ के सुरीले साज़ की मिठास भला कैसे समझ सकते हैं? ठीक उसी तरह, जिन्हें सिर्फ़ अपने हुस्न और नाज़ पर ग़ुरूर हो, वो एक सच्चे आशिक़ की आजिज़ और ख़ामोश इबादत को कभी महसूस नहीं कर सकते।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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