जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक — दाग़ देहलवी

जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक वो मिरे दिल का राज़ क्या जानें

“Those who remain unaware of their own self, how could they ever fathom the secret of my heart?”

— दाग़ देहलवी

अर्थ

जिन्हें अब तक खुद अपनी ही कोई खबर नहीं है, वे मेरे दिल का भेद या राज़ क्या समझेंगे।

विस्तार

यह शेर दिल के एक बेहद नाज़ुक दर्द को बयां करता है। शायर कहता है कि जो इंसान खुद अपनी रूह और जज़्बातों से वाक़िफ़ नहीं, वह किसी दूसरे के दिल की गहराई या मोहब्बत के राज़ को कैसे समझ सकता है? इसमें किसी के लिए कोई कड़वाहट या शिकायत नहीं, बल्कि एक ख़ामोश एहसास है कि हर कोई हमारे जज़्बात की थाह पाने के काबिल नहीं होता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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