ग़ज़ल
दर्द तो मौजूद है दिल में दवा हो या न हो
درد تو موجود ہے دل میں دوا ہو یا نہ ہو
यह ग़ज़ल आंतरिक पीड़ा, समर्पण और भक्ति की उस स्वाभाविक अवस्था को दर्शाती है जो किसी बाह्य समाधान या प्रतिफल की मोहताज नहीं है। इसमें शांत स्वीकार्यता और दार्शनिक गहराई के साथ यह भाव व्यक्त हुआ है कि भावनाएँ अपनी सच्चाई में स्वयं पूर्ण होती हैं।
Source: rekhta · HI
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1
दर्द तो मौजूद है दिल में दवा हो या न हो
बंदगी हालत से ज़ाहिर है ख़ुदा हो या न हो
दिल में दर्द तो मौजूद है चाहे उसकी कोई दवा हो या न हो, और मेरी हालत से बंदगी साफ़ ज़ाहिर है चाहे ख़ुदा मौजूद हो या न हो।
2
झूमती है शाख़-ए-गुल खिलते हैं ग़ुंचे दम-ब-दम
बा-असर गुलशन में तहरीक-ए-सबा हो या न हो
फूलों की डाली झूमती रहती है और हर पल कलियाँ खिलती रहती हैं, चाहे बाग़ में सुबह की हवा का प्रभाव असरदार हो या न हो।
3
वज्द में लाते हैं मुझ को बुलबुलों के ज़मज़मे
आप के नज़दीक बा-मअ'नी सदा हो या न हो
बुलबुलों के गीत मुझे वज्द और मस्ती की हालत में ले आते हैं, चाहे आपकी नज़र में उनकी आवाज़ का कोई अर्थ हो या न हो।
4
कर दिया है ज़िंदगी ने बज़्म-ए-हस्ती में शरीक
उस का कुछ मक़्सूद कोई मुद्दआ हो या न हो
ज़िंदगी ने मुझे इस दुनिया की महफ़िल में शामिल कर दिया है, चाहे इसका कोई मक़सद या उद्देश्य हो या न हो।
5
क्यूँ सिवल-सर्जन का आना रोकता है हम-नशीं
इस में है इक बात ऑनर की शिफ़ा हो या न हो
ऐ दोस्त, तुम सिविल सर्जन के आने को क्यों रोकते हो? इसमें प्रतिष्ठा की बात है, चाहे मरीज़ को शिफ़ा मिले या न मिले।
6
मौलवी साहिब न छोड़ेंगे ख़ुदा गो बख़्श दे
घेर ही लेंगे पुलिस वाले सज़ा हो या न हो
चाहे ईश्वर माफ़ भी कर दे, लेकिन मौलवी साहब नहीं छोड़ेंगे; बिल्कुल वैसे ही जैसे सज़ा मिले या न मिले, पुलिस वाले तो इंसान को पकड़ ही लेंगे।
7
मिमबरी से आप पर तो वार्निश हो जाएगी
क़ौम की हालत में कुछ इस से जिला हो या न हो
सदस्यता मिलने से आपकी अपनी साख पर तो चमक या पॉलिश आ जाएगी, भले ही इससे क़ौम की स्थिति में कोई सुधार या निखार आए या न आए।
8
मो'तरिज़ क्यूँ हो अगर समझे तुम्हें सय्याद दिल
ऐसे गेसू हूँ तो शुबह दाम का हो या न हो
अगर दिल तुम्हें शिकारी समझता है तो इस पर ऐतराज़ क्यों करते हो; जब ऐसी खूबसूरत ज़ुल्फ़ें हों तो उन पर जाल होने का शक होना लाज़मी है।
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