मौलवी साहिब न छोड़ेंगे ख़ुदा गो बख़्श दे घेर ही लेंगे पुलिस वाले सज़ा हो या न हो

“Even if God grants His pardon, the preacher will not let go; The police are sure to haul you in, whether punished or no.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

चाहे ईश्वर माफ़ भी कर दे, लेकिन मौलवी साहब नहीं छोड़ेंगे; बिल्कुल वैसे ही जैसे सज़ा मिले या न मिले, पुलिस वाले तो इंसान को पकड़ ही लेंगे।

विस्तार

यह शेर धार्मिक ठेकेदारों और हुकूमत के पहरेदारों पर एक बेहद चुटीला और गहरा तंज़ है। शायर मुस्कुराते हुए कहता है कि ख़ुदा तो शायद अपनी रहमत से इंसान को माफ़ भी कर दे, लेकिन मौलवी साहब और पुलिस वाले बिना हिसाब लिए पीछा नहीं छोड़ेंगे। बहुत ही हल्के-फुल्के अंदाज़ में यह शेर यह कड़वी सच्चाई सामने लाता है कि इंसानों के बनाए निज़ाम और उनके फ़ैसले ख़ुदा की बख़्शिश से कहीं ज़्यादा बेरहम होते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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