ग़ज़ल

जो ये दिल है तो क्या सर-अंजाम होगा

जो ये दिल है तो क्या सर-अंजाम होगा

यह ग़ज़ल एक दिल की अनिश्चितता और उसके परिणामों पर सवाल उठाती है। शायर कहते हैं कि यह दिल क्या सर-अंजाम देगा, क्योंकि एक बार जो चीज़ें आँखों में आ गईं, उनका दीदार तो एक दिन आम हो जाएगा। अंत में, वह कहते हैं कि इतनी बे-परदा हरकतें घर से न करें, क्योंकि उस में ज़ालिम भी बदनाम होगा।

गीत सुनें

शेर दर शेर अर्थ

लिपि व अर्थ
1
जो ये दिल है तो क्या सर-अंजाम होगा ता-ख़ाक भी ख़ाक आराम होगा
अगर यह दिल ही है, तो इसका क्या अंजाम होगा। धूल में भी धूल जैसा आराम होगा।
2
मिरा जी तो आँखों में आया ये सुनते कि दीदार भी एक दिन आम होगा
यह सुनकर कि दीदार भी एक दिन आम होगा, मिरा जी तो आँखों में आ गईं।
3
न होगा वो देखा जिसे कब्क तू ने वो इक बाग़ का सर्व-अंदाम होगा
जिसको तूने क़ब्ज़ किया, वह दिखाई नहीं देगा; वह तो बस एक बाग़ का संपूर्ण स्वरूप रहेगा।
4
न निकला कर इतना भी बे-पर्दा घर से बहुत उस में ज़ालिम तो बदनाम होगा
घर से इतना बे-पर्दा न निकला करो, वरना उस में ज़ालिम तो बदनाम होगा।
5
हज़ारों की याँ लग गईं छत से आँखें तू ऐ माह किस शब-ए-लब-ओ-बाम होगा
हज़ारों की याँ छत से आँखों पर पड़ गई हैं; ऐ महबूब, यह लब और गालों की रात कैसी होगी।
6
वो कुछ जानता होगा ज़ुल्फ़ों में फँसना जो कोई असीर ता-दाम होगा
जिस व्यक्ति को केशों में फँसना आता है, वह निश्चित रूप से भाग्य के जादू का बंदी होगा।
7
जिगर-चाकी नाकामी दुनिया है आख़िर नहीं आए जो 'मीर' कुछ काम होगा
अर्थात, दुनिया अंततः एक निराशाजनक और विफल जगह है; यदि मीर नहीं आए, तो कुछ भी नहीं होगा।
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