हज़ारों की याँ लग गईं छत से आँखें — मीर तक़ी मीर
“Thousands of colorful designs have adorned the roof, my eyes; / Tell me, O beloved, what kind of night will this be, of lips and cheek?”
अर्थ
हज़ारों की याँ छत से आँखों पर पड़ गई हैं; ऐ महबूब, यह लब और गालों की रात कैसी होगी।
विस्तार
यह शेर एक गहरे इंतज़ार और बेचैनी को बयां करता है। शायर कहते हैं कि उनकी आँखें हज़ारों तरह के नज़ारों, नज़ारों के भ्रम से भर चुकी हैं। वो चाँद से पूछते हैं कि वो 'लब-ओ-बाम' की रात कब होगी? यानी, वो वो पल, वो वो मुलाक़ात कब होगी जब सब कुछ बस एक-दूसरे के लिए हो। यह सिर्फ़ एक सवाल नहीं, बल्कि एक तड़प है!
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