ग़ज़ल
बुल्लेया की जाणां मैं कौण
بلّھیا کیہ جاݨاں میں کَون
यह ग़ज़ल एक आत्म-परिचय है जिसमें शायर अपनी पहचान की सीमाओं को तोड़ता है। वह कहता है कि न वह किसी विशेष धर्म का पालन करता है, न किसी विशेष संस्कृति या स्थान का। यह मनुष्य के सार्वभौमिक अस्तित्व और आध्यात्मिक यात्रा की बात करता है।
वीडियो · क्लासिक
वीडियो देखें →गीत सुनें
1
نہ میں مومن وچ مسِیتاں
نہ میں وچ کُفر دِیاں رِیتاں
نہ میں پاکاں وچ پلیتاں
نہ میں موسیٰ نہ فرعون
ना मैं मोमिन विच मसीतां
ना मैं विच कुफ़र दियां रीतां
ना मैं पाकां विच पलीतां
ना मैं मूसा ना फ़िरऔन
मैं न मोमिनों के रास्ते पर हूँ, न काफिरों के रास्ते पर। न मैं पाकीज़ों के रास्ते पर हूँ, न मैं मूसा हूँ, न मैं फ़िरौन।
2
نہ میں اندر بید کِتاباں
نہ وچ بھنگاں نہ شراباں
نہ وچ رِنداں مست خراباں
نہ وچ جاگن نہ وچ سون
ना मैं अंदर बेद किताबां
ना विच भंगां ना शराबां
ना विच रिंदां मस्त ख़राबां
ना विच जागण ना विच सौण
न मन अंदर वेद किताबें
न विच भंगां न शराबاں
न विच रिंदान मसत खराबां
न विच जागन न विच सौन
3
نہ وچ شادی نہ غمناکی
نہ میں وچ پلیتی پاکی
نہ میں آبی نہ میں خاکی
نہ میں آتش نہ میں پون
ना विच शादी ना ग़मनाकी
ना मैं विच पलीती पाकी
ना मैं आबी ना मैं ख़ाकी
ना मैं आतिश ना मैं पौण
मैं न शादी हूँ न गमनाकी, मैं न मैं पलेटी पाकी। मैं न आबी न मैं खाकी, मैं न आतिश न मैं पाउन।
4
نہ میں عربی نہ لاہوری
نہ میں ہندی شہر ناگوری
نہ ہندو نہ تُرک پشاوری
نہ میں رہندا وچ ندون
ना मैं अरबी ना लाहौरी
ना मैं हिंदी शहर नागौरी
ना हिंदू ना तुरक पशावरी
ना मैं रहंदा विच नदौन
मैं न अरबी हूँ और न लाहौरी, न ही मैं हिंदी हूँ और न मैं नगाउरी। न मैं हिंदू हूँ और न ही मैं पेशावर का तुर्क; मैं किसी एक जगह का निवासी नहीं हूँ।
5
نہ میں بھیت مذہب دا پایا
نہ میں آدم حوّا جایا
نہ میں اپنا نام دھرایا
نہ وچ بیٹھن نہ وچ بھَون
ना मैं भेद मज़हब दा पाया
ना मैं आदम हव्वा जाया
ना मैं अपना नाम धराया
ना विच बैठण ना विच भौण
मैंने न धर्म पाया, न इंसान बना; न अपना नाम स्थापित किया, न विचार में बैठा और न ही चिंतन में।
6
اوّل آخر آپ نوں جاݨاں
نہ کوئی دوجا ہور پچھاݨاں
میتھوں ہور نہ کوئی سِیاݨاں
بُلّھا! اوہ کھڑا ہے کَون
अव्वल आख़िर आप नूं जाणां
ना कोई दूजा होर पछाणां
मैथों होर ना कोई सियाणां
बुल्ल्हा! ओह खड़्हा है कौन
अर्थात, सबसे पहले आपको स्वयं को जानना चाहिए, क्योंकि कोई दूसरा व्यक्ति आपको पहचान नहीं सकता। और दूसरों में कोई सच्चा ज्ञानी नहीं है; बुलला! बताओ, वहाँ कौन खड़ा है।
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
