ग़ज़ल

મને

મને
अमृत घायल· Ghazal· 9 shers

यह ग़ज़ल स्वयं के प्रति एक गहन आत्म-स्वीकृति और आत्म-प्रेम की भावना को दर्शाती है। कवि 'मैं' (स्वयं) के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए, जीवन की यात्रा में स्वयं को केंद्र में रखता है। यह आंतरिक खोज और आत्म-पहचान के महत्व पर ज़ोर देती है।

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
ક્યાં હજી પૂરો પિવાડ્યો છે મને! સાકીએ થોડો ચખાડ્યો છે મને.
कहाँ अभी पूरा पिलाया है मुझे!साक़ी ने थोड़ा चखाया है मुझे।
साकी ने मुझे अभी तक पूरा नहीं पिलाया है। उसने मुझे केवल थोड़ा सा चखाया है।
2
દરિયો માનીને રંજાડ્યો છે મને ચાંદનીએ બહુ દઝાડ્યો છે મને
दरिया मानकर सताया है मुझे चांदनी ने बहुत जलाया है मुझे
मुझे समुद्र मानकर सताया गया है। चाँदनी ने मुझे बहुत जलाया है।
3
રાતદી લાગટ કરાવી ઊઠબેસ બેકરારીએ થકાડ્યો છે મને
रात-दिन लगातार करवाई उठ-बैठ बेकरारी ने थका दिया है मुझे
रात-दिन लगातार उठक-बैठक करवाई गई है। बेचैनी ने मुझे थका दिया है।
4
ગીચ દુર્ગમ વાયદાની વાટમાં સાંજ વેળાએ: ઉભાડ્યો છે મને
सघन दुर्गम वादों की राह में, साँझ वेला में: मुझे खड़ा कर दिया है।
मुझे घने और कठिन वादों के रास्ते में शाम के समय खड़ा कर दिया गया है। यह दर्शाता है कि दिन के अंत में मुझे अधूरे वादों से घिरी एक मुश्किल स्थिति में छोड़ दिया गया है।
5
જ્યારથી આંખે થયો છું રાતની ત્યારથી, રાતે જગાડ્યો છે મને
ज्यों ही मेरी आँखें रात की हुईं, त्यों ही रात ने मुझे जगाया है।
वक्ता कहता है कि जब से उसकी आँखें रात की आदी हो गईं, तब से रात ने ही उसे जगाए रखा है।
6
આંધીઓ સારે છે અશ્રુ આજ પણ ભરયુવાનીમાં બુડાડ્યો છે મને
आँधियाँ बहाती हैं अश्क़ आज भी,भरयुवानी में डुबोया है मुझे
आँधियाँ आज भी आँसू बहाती हैं, उन्होंने मुझे भरी जवानी में डुबो दिया है।
7
મેં મને ખરચ્યો છે છુટ્ટા હાથથી મેં જ ખરચીને ખુટાડ્યો છે મને.
मैंने खुद को खुले हाथों से खर्च किया है,मैंने ही खर्च कर खुद को खत्म किया है।
मैंने खुद को खुले हाथों से खर्च किया है, मैंने ही खर्च करके खुद को खत्म कर दिया है।
8
પંચતત્ત્વોનું તો કેવળ નામ છે, માંસ મજ્જામાં ખુતાડ્યો છે મને
पंचतत्त्वों का तो केवल नाम है, मांस मज्जा में धँसाया है मुझे
पंच तत्व केवल नाम मात्र हैं; उसने मुझे मांस और मज्जा में धँसा दिया है।
9
આજ ‘ઘાયલ’ કેફનું શું પૂછ્યું! આજ ‘તૌબા’એ પિવાડ્યો છે મને.
आज ‘घायल’ कैफ़ का क्या पूछना!आज ‘तौबा’ ने पिलाया है मुझे।
आज घायल के नशे के बारे में क्या पूछना, वह तो अतुलनीय है। आज तो तौबा (पश्चाताप) ने ही मुझे कुछ ऐसा पिलाया है जिससे मैं इस गहन अवस्था में हूँ।
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.