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ग़ज़ल

મને

મને
अमृत घायल· Ghazal· 9 shers

यह ग़ज़ल स्वयं के प्रति एक गहन आत्म-स्वीकृति और आत्म-प्रेम की भावना को दर्शाती है। कवि 'मैं' (स्वयं) के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए, जीवन की यात्रा में स्वयं को केंद्र में रखता है। यह आंतरिक खोज और आत्म-पहचान के महत्व पर ज़ोर देती है।

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ગીચ દુર્ગમ વાયદાની વાટમાં સાંજ વેળાએ: ઉભાડ્યો છે મને
सघन दुर्गम वादों की राह में, साँझ वेला में: मुझे खड़ा कर दिया है।
मुझे घने और कठिन वादों के रास्ते में शाम के समय खड़ा कर दिया गया है। यह दर्शाता है कि दिन के अंत में मुझे अधूरे वादों से घिरी एक मुश्किल स्थिति में छोड़ दिया गया है।
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આજ ‘ઘાયલ’ કેફનું શું પૂછ્યું! આજ ‘તૌબા’એ પિવાડ્યો છે મને.
आज ‘घायल’ कैफ़ का क्या पूछना!आज ‘तौबा’ ने पिलाया है मुझे।
आज घायल के नशे के बारे में क्या पूछना, वह तो अतुलनीय है। आज तो तौबा (पश्चाताप) ने ही मुझे कुछ ऐसा पिलाया है जिससे मैं इस गहन अवस्था में हूँ।
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