बनावट की शेख़ी नहीं रहती शैख़ ये इज़्ज़त तो जाएगी पर जाएगी

“Pretensions and false boasts cannot endure, O Sheikh; this honor of yours is bound to go, and go it surely will.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

हे शैख़, दिखावे और बनावट का घमंड कभी टिकता नहीं है, तुम्हारी यह इज़्ज़त यक़ीनन एक न एक दिन चली ही जाएगी।

विस्तार

इस शेर में शायर ने ज़ाहिरी दिखावा करने वाले 'शैख़' यानी ढोंगी धर्मगुरुओं पर बड़ा ही करारा तंज़ कसा है। यहाँ 'शैख़' और 'शैख़ी' (घमंड या झूठी शान) के दिलचस्प लफ़्ज़ों के खेल से यह बात साफ़ की गई है कि पाखंड का मुखौटा कभी न कभी उतर ही जाता है। शायर दो-टूक अंदाज़ में समझाता है कि जो इज़्ज़त सिर्फ़ दिखावे पर टिकी हो, उसका एक दिन ख़ाक में मिलना बिल्कुल तय है।

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