ग़ज़ल
होना आशिक़ सच कर इस दुश्मन-ए-ईमान का
ہونا عاشق سچ کر اس دشمن ایمان کا
Source: Deewan-e-Zauq (1923) · HI
गीत सुनें
1
होना आशिक़ सच कर इस दुश्मन-ए-ईमान का
दिल न कर जल्दी कि जल्दी काम है शैतान का
इस ईमान के दुश्मन का आशिक़ होना सच कर दिखा, मगर दिल को जल्दी मत कर, क्योंकि जल्दबाज़ी शैतान का काम है।
2
झूट ही जानूँ कलाम इस हर्ज़ा-बयान का
सुन कर बारे में वो आए अगर क़ुरआन का
मैं इस व्यर्थ बकने वाली ज़बान की बातों को झूठ ही समझूँ, पर अगर वह उसके बारे में कुछ कहे तो उसे क़ुरआन की तरह सच मानूँ।
3
तो हमारी ज़िंदगी पर ज़िंदगी की क्या उम्मीद
तो हमारी जान को बन आया भरोसा जान का
तब हमारी ज़िंदगी पर ज़िंदगी की क्या उम्मीद रह जाती है; तब हमारी जान को तो जान का ही भरोसा बन आया।
4
जो दिल-ए-पुर-आरज़ू से निकला नाला इश्क़ में
एक पुतला था सरापा हसरत-ओ-हिर्मान का
इश्क़ में आरज़ुओं से भरे दिल से जो फ़रियाद उठी, वह सर से पाँव तक हसरत और नाउम्मीदी की बनी हुई एक मूरत थी।
5
बन गया जोश-ए-मोहब्बत से हमारे सीना में
माही-ए-दरिया-ए-ख़ून जौहर तिरे पैकान का
हमारे सीने में मोहब्बत के जोश से तेरे तीर की नोक की चमक ख़ून के दरिया में तैरती हुई मछली बन गई।
6
जो फ़रिश्ते करते हैं कर सकता है इंसान भी
पर फ़रिश्तों से न हो जो काम है इंसान का
जो काम फ़रिश्ते करते हैं, वही काम इंसान भी कर सकता है; लेकिन जो काम फ़रिश्तों से नहीं हो सकता, वही असल में इंसान का काम है।
7
ये तप-ए-ग़म की है शिद्दत इस तिरे बीमार को
यौम-ए-राहत भी है जिन्हें उसके दिन बोहरान का
तेरे इस बीमार पर ग़म के बुख़ार की इतनी शिद्दत है कि जो दिन उसके लिए आराम के होने चाहिए, वे भी उसके मर्ज़ के बोहरान (संकट) के दिन बन जाते हैं।
8
इसे अजल तकलीफ़ मत को क्या करेगी आकर
हो चुका पहले ही मैं कुश्ता किसी की आन का
मौत इसे तकलीफ़ न दे—आकर वह क्या कर लेगी? मैं तो पहले ही किसी के नाज़-ओ-अदा से मारा जा चुका हूँ।
9
हो सके आलूदा-दामन पाक-दामन किस तरह
ऐ ज़ुलैख़ा छोड़ दामन यूसुफ़-ए-कनआन का
जिसका दामन दागदार हो वह पाकदामन कैसे कहला सकता है; इसलिए ऐ ज़ुलैख़ा, यूसुफ़-ए-कनआन का दामन छोड़ दे।
10
नफ़्स-ए-बे-मिक़दार को क़ुदरत हो गर थोड़ी भी
देख फिर दावा फ़िरऔन-ए-बे-सामान का
अगर तुच्छ और नीच नफ़्स को थोड़ी सी भी ताक़त मिल जाए, तो फिर देखो कि साधनहीन फ़िरऔन किस तरह ख़ुदाई का दावा करने लगता है।
11
देखना ऐ ज़ौक़ होंगे आज फिर लाखों के ख़ून
फिर चबाया उस ने लब पे पान का
देखो ऐ ज़ौक़, आज फिर लाखों लोगों का ख़ून होगा, क्योंकि उसने एक बार फिर अपने होंठों पर पान चबाया है।
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