देखना ऐ ज़ौक़ होंगे आज फिर लाखों के ख़ून — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“Behold, O Zauq, today again a hundred thousand hearts shall bleed— For once more she has pressed the betel-leaf against her crimson lips.”
अर्थ
देखो ऐ ज़ौक़, आज फिर लाखों लोगों का ख़ून होगा, क्योंकि उसने एक बार फिर अपने होंठों पर पान चबाया है।
विस्तार
शायर खेल-भरे अंदाज़ में एक खतरे की ओर इशारा करता है। वह देखता है कि उसकी महबूबा अपने होंठों पर पान चबा रही है, जिससे उसके होंठ गहरे लाल हो जाते हैं। यह लाली उसे खून की याद दिलाती है। इसलिए वह मज़ाक में कहता है, 'देखना ऐ ज़ौक़, आज फिर लाखों दिल कत्ल होंगे।' यह तस्वीर हल्की-फुल्की और चतुर है। महबूबा की खूबसूरती इतनी असरदार है कि सिर्फ होंठों को लाल करना ही बहुत से चाहने वालों के बेबस होकर दिल हारने की वजह बन जाता है। यहाँ कोई सच्ची हिंसा नहीं, बस कशिश की प्यारी-सी शरारत है। शायर दिखाता है कि खूबसूरती का छोटा-सा इशारा कितने लोगों को एक साथ बेचैन कर देता है।
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