नफ़्स-ए-बे-मिक़दार को क़ुदरत हो गर थोड़ी भी — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“Let the worthless self gain but a little power, then behold the claim of a destitute Pharaoh.”
अर्थ
अगर तुच्छ और नीच नफ़्स को थोड़ी सी भी ताक़त मिल जाए, तो फिर देखो कि साधनहीन फ़िरऔन किस तरह ख़ुदाई का दावा करने लगता है।
विस्तार
यह शेर हमें अहंकार के बारे में प्यार से सचेत करता है। कवि कहते हैं कि एक छोटा, तुच्छ मन भी अगर उसे ज़रा-सी ताक़त मिल जाए तो तुरंत घमंड से भर जाता है। फिर देखिए, वह फ़िरऔन की तरह बड़े-बड़े दावे करने लगता है, जबकि उसके पास कोई असली सामर्थ्य या पूँजी नहीं होती। असल बड़प्पन कभी शेख़ी नहीं बघारता। संदेश सरल है: थोड़ी-सी सत्ता भी हमारे भीतर छिपी कमज़ोरी और खोखलेपन को उजागर कर देती है, और एक खाली दिल ख़ुद को राजा समझने लगता है। इसलिए विनम्र रहना ही सच्ची समझदारी है।
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