जो फ़रिश्ते करते हैं कर सकता है इंसान भी — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

जो फ़रिश्ते करते हैं कर सकता है इंसान भी पर फ़रिश्तों से न हो जो काम है इंसान का

“What angels do, a mortal man can do as well; But what no angel can—that is the work of man.”

— शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

अर्थ

जो काम फ़रिश्ते करते हैं, वही काम इंसान भी कर सकता है; लेकिन जो काम फ़रिश्तों से नहीं हो सकता, वही असल में इंसान का काम है।

विस्तार

यह शेर हमें हमारी असली कीमत याद दिलाता है। जो काम फ़रिश्ते करते हैं, वही काम इंसान भी कर सकता है। हम भी नेकी, दया और इबादत के काबिल हैं। लेकिन एक काम ऐसा है जो सिर्फ़ इंसान ही कर सकता है, जो फ़रिश्तों से भी नहीं हो पाता। वह काम हमारी मेहनत, हमारे संघर्ष और हमारी आज़ाद मर्ज़ी से जन्म लेता है। फ़रिश्ते पाक हैं, पर उन्हें आज़माइश और मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता। हमें करना पड़ता है, फिर भी हम उनसे ऊपर उठ सकते हैं। इसलिए शायर इंसान की ताक़त की तारीफ़ करता है। हमारी असली बड़ाई इसी में है कि हम अपनी कमज़ोरियों पर काबू पाकर वह करें जो सिर्फ़ हमारा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.