ग़ज़ल
दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
यह ग़ज़ल बताती है कि दिल का इश्क़ हमेशा एक नबरद (स्वर्णिम) हरीफ़ रहा है। जीवन के हर दाग और दर्द की जगह पर एक धूल-भरा रास्ता था। यह ग़ज़ल बताती है कि दिल की टूटन ने हमें डराए रखा, और जब वह चीं जबीं पर आई, तो वहाँ रंग ज़र्द था।
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1
दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
अब जिस जगह कि दाग़ है याँ आगे दर्द था
दिल हमेशा इश्क़ के युद्ध का मैदान रहा, और अब जहाँ भी कोई दाग है, वहाँ दर्द ही बसता है।
2
इक गर्द-ए-राह था पय-ए-महमिल तमाम राह
किस का ग़ुबार था कि ये दुम्बाला गर्द था
रास्ते पर एक धूल थी, जो वाहक के पैरों के नीचे थी, पूरी राह पर; यह किस चीज़ का गुबार था कि यह दुम्बाला की धूल थी।
3
दिल की शिकस्तगी ने डराए रखा हमें
वाँ चीं जबीं पर आई कि याँ रंग ज़र्द था
दिल की बेवफाई ने हमें डराए रखा, जब ज़ुबान पर आई तो कहा, 'यहाँ रंग फीका है।'
4
मानिंद-ए-हर्फ़ सफ़्हा-ए-हस्ती से उठ गया
दिल भी मिरा जरीदा-ए-आलम में फ़र्द था
शब्दों के स्वामी (मानिंद-ए-हर्फ़) अस्तित्व के पन्ने से उठ गए, मेरे दिल भी दुनिया के धागे में एक अकेला कण था।
5
था पुश्ता रेग-ए-बाद ये इक वक़्त कारवाँ
ये गर्द-बाद कोई बयाबाँ नवर्द था
धूल के इस रेगिस्तान के पार एक वक़्त का कारवाँ गुज़रा; यह धूल का गुबार किसी बंजर रेगिस्तान का नहीं था।
6
गुज़री मुदाम उस की जवानान-ए-मस्त में
पीर-ए-मुग़ाँ भी तुर्फ़ा कोई पीर मर्द था
गुज़री मदाम उस की जवानी के मद में; पीर-ए-मुगाँ भी तुर्फ़ा कोई पीर मर्द था। इसका अर्थ है कि वह मस्ती और जवानी का नशा बस गुज़रा हुआ दौर था; यहाँ तक कि महान संत भी एक साधारण, विनम्र प्रेम करने वाले पुरुष थे।
7
आशिक़ हैं हम तो 'मीर' के भी ज़ब्त-ए-इश्क़ के
दिल जल गया था और नफ़स लब पे सर्द था
यदि हम आशिक़ हैं, तो 'मीर' के भी प्रेम के संयम ने दिल जला दिया था और साँस होंठों पर ठंडी थी।
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