था पुश्ता रेग-ए-बाद ये इक वक़्त कारवाँ — मीर तक़ी मीर
“Through this desert of dust, a caravan passed by; this dust-cloud was not from a desert.”
अर्थ
धूल के इस रेगिस्तान के पार एक वक़्त का कारवाँ गुज़रा; यह धूल का गुबार किसी बंजर रेगिस्तान का नहीं था।
विस्तार
यह शेर जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता और आराम के बारे में है। शायर एक गुज़रते हुए कारवाँ की तुलना रेगिस्तान के बीच अचानक मिले किसी नखलिस्तान से करते हैं। उनका कहना है कि यह जो धूल-मिट्टी है, यह सिर्फ किसी वीरान जगह की नहीं है। इसका मतलब है कि जीवन में जो भी सुख या सुकून मिलता है, वह बहुत अस्थायी होता है, फिर भी उस पल में वह कितना सच्चा लगता है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
