आशिक़ हैं हम तो 'मीर' के भी ज़ब्त-ए-इश्क़ के — मीर तक़ी मीर

आशिक़ हैं हम तो 'मीर' के भी ज़ब्त-ए-इश्क़ के दिल जल गया था और नफ़स लब पे सर्द था

“If we are lovers, even the restraint of love from 'Mir's' verse, Burned the heart, and the breath was cold upon the lips.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

यदि हम आशिक़ हैं, तो 'मीर' के भी प्रेम के संयम ने दिल जला दिया था और साँस होंठों पर ठंडी थी।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की गहराई को बयान करता है। शायर कहते हैं कि अगर मैं इश्क़ के ज़ब्त (त्याग) के भी हो जाऊँ.... तो मेरा दिल जल चुका होगा, और मेरी साँसें (नफ़स) मेरे होंठों पर ठंडी ही रहेंगी। इसका मतलब है कि यह इश्क़ सिर्फ़ एक भावना नहीं, बल्कि मेरी पहचान बन चुका है! यह एहसास कि इश्क़ ने मुझे अंदर से बदल दिया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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