ग़ज़ल
कल 'मीर' ने क्या क्या की मय के लिए बेताबी
कल 'मीर' ने क्या क्या की मय के लिए बेताबी
यह ग़ज़ल मिर्ज़ा ग़ालिब के एक अंदाज़ में, शराब (मय) के लिए व्याकुलता और प्रेम की तीव्र उत्कंठा को दर्शाती है। शायर अपनी बेचैनी का कारण न केवल प्रेम है, बल्कि एक गहन आंतरिक उथल-पुथल भी है। वह अपने प्रिय के प्रेम की याद में रात-दिन जलता रहता है, और यह बेचैनी एक ऐसी आग के समान है जिसे शांत करना असंभव है।
गीत सुनें
1
कल 'मीर' ने क्या क्या की मय के लिए बेताबी
आख़िर को गिरो रखा सज्जादा-ए-मेहराबी
कल 'मीर' ने मय के लिए क्या क्या बेताबी की, आख़िर को सज्जादा-ए-मेहराबी पर गिर पड़ा।
2
जागा है कहीं वो भी शब मुर्तकिब-ए-मय हो
ये बात सुझाती है उन आँखों की बे-ख़्वाबी
कहीं वो भी शब-ए-मय का मुर्तकिब होगा, यह बात उन आँखों की बे-ख़्वाबी से पता चलती है।
3
क्या शहर में गुंजाइश मुझ बे-सर-ओ-पा को हो
अब बढ़ गए हैं मेरे अस्बाब-ए-कम-असबाबी
क्या इस शहर में किसी जगह है मेरे लिए, जो सिर रहित और शक्तिहीन हूँ? अब मेरी परिस्थितियाँ सिर्फ साधारण मामलों से कहीं अधिक जटिल हो गई हैं।
4
दिन-रात मिरी छाती जलती है मोहब्बत में
क्या और न थी जागा ये आग जो याँ दाबी
दिन-रात मेरी छाती मोहब्बत में जलती है; और क्या था, ये आग जो यहाँ दबी थी।
5
सो मलक फिरा लेकिन पाई न वफ़ा इक जा
जी खा गई है मेरा इस जिंस की नायाबी
हे प्रिय, मैं भटकता रहा लेकिन वफा नहीं मिल पाई, और हे प्यारे, मेरे इस अस्तित्व की नायाबी (दुर्लभता) समाप्त हो गई है।
6
ख़ूँ बस्ता न क्यूँ पलकें हर लहज़ा रहीं मेरी
जाते नहीं आँखों से लब-ए-यार के उन्नाबी
मेरा रक्त क्यों नहीं थमता, मेरी पलकें क्यों बेचैन हैं, हर लफ़्ज़ मेरा ही क्यों है। वे आँखों से नहीं जाते, महबूब के मनमोहक होंठों के।
7
जंगल ही हरे तन्हा रोने से नहीं मेरे
कोहों की कमर तक भी जा पहुँची है सैराबी
मेरे अकेलेपन ने मेरे बालों की कमर तक भी नहीं पहुँचा है, फिर भी यह सैरबी (भटकने वाली/घुमंतू) बहुत दूर तक चली गई है।
8
थे माह-विशाँ कल जो उन कोठों पे जल्वे में
है ख़ाक से आज उन की हर सहन में महताबी
कल उन कोठों में जो जीवन की चमक थी, आज उनकी हर साँस में वह महक केवल धूल मात्र है।
9
कल 'मीर' जो याँ आया तौर इस का बहुत भाया
वो ख़ुश्क-लबी तिस पर जामा गले में आबी
कल जब मैं यहाँ आया, तो मुझे इस तरह का तौर-तरीका बहुत अच्छा लगा, लेकिन वह सूखी-होंठ वाली औरत ने अपने गले में एक कपड़ा डाल रखा है।
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