कल 'मीर' ने क्या क्या की मय के लिए बेताबी आख़िर को गिरो रखा सज्जादा-ए-मेहराबी

“What mischief 'Mir' did for the sake of wine, oh restlessness, At last, he fell upon the cushion of the niche.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

कल 'मीर' ने मय के लिए क्या क्या बेताबी की, आख़िर को सज्जादा-ए-मेहराबी पर गिर पड़ा।

विस्तार

यह शेर इच्छा और आत्म-सम्मान के बीच के संघर्ष को दिखाता है। मीर मिर्ज़ा अपनी पिछली रात की बेचैनी का वर्णन कर रहे हैं। वो कहते हैं कि कल मय (शराब) के लिए उनका मन कितना बेचैन था.... लेकिन अंत में, उन्होंने अपना आत्म-सम्मान और मर्यादा (सज्जादा-ए-मेहराबी) बनाए रखी। यह संयम की एक बहुत गहरी बात है!

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