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सो मलक फिरा लेकिन पाई वफ़ा इक जा जी खा गई है मेरा इस जिंस की नायाबी

I wandered, O beloved, but found no loyalty, oh dear, My essence is consumed by the rarity of this affair.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे प्रिय, मैं भटकता रहा लेकिन वफा नहीं मिल पाई, और हे प्यारे, मेरे इस अस्तित्व की नायाबी (दुर्लभता) समाप्त हो गई है।

विस्तार

इस शेर में मिर्ज़ा ग़ालिब ने जीवन के बड़े दर्द को बयान किया है। शायर कह रहे हैं कि मैंने बहुत से लोगों में वफ़ा की तलाश की, पर कहीं भी वो वफ़ा नहीं मिली। और यह दूसरी लाइन.... यह बताती है कि ज़िन्दगी की भाग-दौड़ ने मेरे अंदर की जो नज़ाकत थी, जो मेरा अपनापन था.... उसे पूरी तरह से खत्म कर दिया है। यह सिर्फ़ प्यार की बात नहीं है, यह जीने की हक़ीक़त का दर्द है।

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पाठ
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