ग़ज़ल
हुज़ूर-ए-शाह में अहल-ए-सुख़न की आज़माइश है
حضورِ شاہ میں اہلِ سخن کی آزمائش ہے
यह ग़ज़ल, जिसका शीर्षक "हुज़ूर-ए-शाह में अहल-ए-सुख़न की आज़माइश है" है, जीवन के विभिन्न पहलुओं में व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली 'आज़माइश' या 'परीक्षा' के विषय पर प्रकाश डालती है। यह दर्शाती है कि कैसे कवियों की राजदरबारों में, प्रेमियों की सौंदर्य और निष्ठा में, और यहाँ तक कि प्रकृति के तत्वों की भी अपनी-अपनी तरह से परीक्षा होती है, जो चुनौतियों के सर्वव्यापी स्वभाव पर ज़ोर देती है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
हुज़ूर-ए-शाह में अहल-ए-सुख़न की आज़माइश है
चमन में ख़ुश-नवायान-ए-चमन की आज़माइश है
राजा की उपस्थिति में बोलनेवालों की कुशलता की परीक्षा होती है। ठीक वैसे ही, बगीचे में मीठी आवाज़ वाले पक्षियों की भी परीक्षा होती है।
2
क़द ओ गेसू में क़ैस ओ कोहकन की आज़माइश है
जहाँ हम हैं वहाँ दार-ओ-रसन की आज़माइश है
प्रेमिका के कद और केशों में क़ैस और कोहकन (फरहाद) जैसे प्रेमियों की आज़माइश है। लेकिन जहाँ हम हैं, वहाँ फाँसी और रस्सी जैसी कठिन आज़माइश है।
3
करेंगे कोहकन के हौसले का इम्तिहान आख़िर
अभी उस ख़स्ता के निरू-ए-तन की आज़माइश है
अभी उस थके हुए व्यक्ति के शारीरिक बल की परीक्षा है। अंत में कोहकन के हौसले का इम्तिहान लिया जाएगा।
4
नसीम-ए-मिस्र को क्या पीर-ए-कनआँ' की हवा-ख़्वाही
उसे यूसुफ़ की बू-ए-पैरहन की आज़माइश है
मिस्र की हवा को पीर-ए-कनआँ (हज़रत याक़ूब) की हालत से क्या लेना-देना? उसे तो बस यूसुफ़ की क़मीज़ की ख़ुशबू को आज़माना है।
5
वो आया बज़्म में देखो न कहियो फिर कि ग़ाफ़िल थे
शकेब-ओ-सब्र-ए-अहल-ए-अंजुमन की आज़माइश है
देखो, वह महफ़िल में आ गया है; बाद में यह न कहना कि तुम बेख़बर थे। यह सभा के सदस्यों के धैर्य और सहनशीलता की परीक्षा है।
6
रहे दिल ही में तीर अच्छा जिगर के पार हो बेहतर
ग़रज़ शुस्त-ए-बुत-ए-नावक-फ़गन की आज़माइश है
तीर दिल में ही रहे तो अच्छा है, या जिगर के आर-पार हो जाए तो और भी बेहतर है। असल मकसद तो तीर चलाने वाले बुत (महबूब) के निशाने की आज़माइश करना है।
7
नहीं कुछ सुब्हा-ओ-ज़ुन्नार के फंदे में गीराई
वफ़ादारी में शैख़ ओ बरहमन की आज़माइश है
रोज़री या जनेऊ जैसे बाहरी धार्मिक प्रतीकों में कोई वास्तविक महत्व नहीं है। शेख और ब्राह्मण दोनों के लिए सच्ची परीक्षा उनकी वफादारी और निष्ठा में है।
8
पड़ा रह ऐ दिल-ए-वाबस्ता बेताबी से क्या हासिल
मगर फिर ताब-ए-ज़ुल्फ़-ए-पुर-शिकन की आज़माइश है
हे बंदी दिल, बेचैनी से क्या मिलेगा? लेकिन फिर से प्रेमिका की घुंघराली ज़ुल्फ़ों की शक्ति का परीक्षण है।
9
रग-ओ-पय में जब उतरे ज़हर-ए-ग़म तब देखिए क्या हो
अभी तो तल्ख़ी-ए-काम-ओ-दहन की आज़माइश है
जब ग़म का ज़हर रग-रग में उतर जाएगा, तब देखिएगा कि क्या होगा। अभी तो यह केवल मुँह की कड़वाहट की आज़माइश है।
10
वो आवेंगे मिरे घर वा'दा कैसा देखना 'ग़ालिब'
नए फ़ित्नों में अब चर्ख़-ए-कुहन की आज़माइश है
ग़ालिब, देखो तो सही कि उनके मेरे घर आने का यह कैसा वादा है? अब इन नई मुसीबतों में पुराने आसमान (या भाग्य) की परीक्षा हो रही है।
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