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ग़ज़ल

વિખવાદના છાંટા

વિખવાદના છાંટા
अमृत घायल· Ghazal· 7 shers

यह ग़ज़ल विखंडन और मतभेदों के कारण उत्पन्न होने वाले बिखराव और तनाव को दर्शाती है। यह बताती है कि कैसे बाहरी संघर्ष और आंतरिक कलह रिश्तों और सामंजस्य को खंडित कर देते हैं। यह मनुष्य को शांति और एकता के महत्व का स्मरण कराती है।

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અમારી આંખમાં છે આજ એની યાદના છાંટા, વિના વરસાદ આવે છે અહીં વરસાદના છાંટા!
हमारी आँख में हैं आज उसकी याद के छींटे, बिना बरसात आते हैं यहाँ बरसात के छींटे!
आज हमारी आँखों में प्रिय की यादों के आँसू हैं, जो बिना बारिश के ही बरसात के बूँदों की तरह बरस रहे हैं। यह एक गहरी उदासी या विरह वेदना को व्यक्त करता है।
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દિલાસાનો હતો ખપ, દિ ગયા એ ક્યારના વીતી, હવે શા કામના મારે આ અવસર બાદના છાંટા?
दिलासे की थी ज़रूरत, वो दिन गए कब के बीत,अब क्या काम के मेरे ये अवसर बाद के छींटे?
मुझे दिलासे की ज़रूरत थी, लेकिन वो दिन तो कब के गुज़र चुके हैं। अब जब ज़रूरत का वक़्त बीत गया है, तो ये बाद में मिलने वाले कुछ छींटे मेरे किसी काम के नहीं।
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નિહાળી જામ, ‘ઘાયલ’ રંગમાં આવી ગયા કેવા? ઘણાં વર્ષો પછી જાણે થયા વરસાદના છાંટા!
निहाली जाम, ‘घायल’ रंग में आ गए कैसे?कई वर्षों के बाद जैसे हुए वर्षा के छींटे!
जाम को देखते ही 'घायल' में ऐसी उमंग और उत्साह भर गया, मानो कई वर्षों के सूखे के बाद बारिश की पहली बूँदें गिरी हों। यह किसी लंबे इंतजार के बाद मिली खुशी या प्रेरणा का वर्णन है।
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