क्यों न लगे मीठा कंठ इस सागर किनारे का?घुले हैं उसमें झरनों के कलनाद के छींटे।

“How could this seashore's voice not be sweet?When within it, streams' melodious murmurs meet.”

— अमृत घायल
अर्थ

इस सागर किनारे की आवाज़ मधुर क्यों न लगे? क्योंकि इसमें झरनों की मधुर ध्वनि के अंश समाहित हैं।

विस्तार

ये शेर प्रकृति की अद्भुत सामंजस्य को दिखाता है। शायर कहते हैं कि इस सागर के किनारे की आवाज़ में मिठास क्यों नहीं है? इसका कारण है कि इसमें झरनों की कलनाद—वो मीठे छींटे—घुल गए हैं। यह हमें सिखाता है कि जब दो विपरीत चीज़ें, जैसे कि सागर की गर्जना और झरने की कोमलता, एक साथ आती हैं, तो जो परिणाम मिलता है, वह बेहद खूबसूरत होता है।

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