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मुझे बुलाने की हिम्मत की थी पलकें झुकाकर,अब भी भिगोते हैं वे अवाचक बुलावे के छींटे!

To call me, she had dared, with eyelids lowered,Still, the sprinkles of that silent call drench me!

अमृत घायल
अर्थ

उसने मुझे बुलाने की हिम्मत पलकें झुकाकर की थी। उस बेज़ुबान पुकार के छींटे आज भी मुझे भिगोते हैं।

विस्तार

यह शेर उस अनकही तड़प को बयां करता है, जो कभी खत्म नहीं होती। शायर कहते हैं कि महबूबा ने एक बार तो बुलाने की हिम्मत की थी, पर वो पलकें झुकाकर किया था। लेकिन दर्द ये है कि आज भी.... वो अवाच्य बुलावे के छींटे, हमें भिगो जाते हैं। यह यादों का वो सैलाब है, जो कभी थमना नहीं चाहता।

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