شاعری کی سمجھ · 6:29
गुजराती कविता: नरमद, कलापी, मेघाणी
Gujarati Kavitano Vishal Atma
اس ویڈیو کے بارے میں
गुजराती कविता भावनाओं, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत का खजाना है। 'Poetry Explained' की यह कड़ी गुजराती कविता के विशाल आत्मा में झांकती है, जिसमें मध्यकालीन भक्ति और रहस्यवाद से लेकर आधुनिक आत्मनिरीक्षण और सामाजिक चेतना तक की यात्रा दिखाई गई है। वीडियो में गुजराती साहित्यिक विरासत की भव्यता को दर्शाया गया है, जो भले ही उर्दू या हिंदी कविता जितनी चर्चित न हो, लेकिन उतनी ही गहन और अनूठी है।
इसमें प्रमुख कवियों—नरमद, जिन्होंने धार्मिक सीमाओं को तोड़ा और कविता में आधुनिकता व प्रकृति को स्थान दिया; कलापी, जिनकी कविताओं में फारसी-उर्दू ग़ज़ल की नजाकत और गुजराती रोमांस का संगम है; और झवेरचंद मेघाणी, जिनके गीतों ने स्वतंत्रता संग्राम को ऊर्जा दी और हाशिए के समाज को आवाज़ दी—की चर्चा है। लोक परंपरा, संगीत और आधुनिक मंचों पर आज भी जीवंत गुजराती कविता की विरासत को यह एपिसोड सलाम करता है।
- ◆गुजराती कविता में गहरी भावना और सांस्कृतिक विरासत का संगम है।
- ◆नरमद ने कविता में आधुनिकता और सामाजिक परिवर्तन लाए।
- ◆कलापी ने राजसी संवेदनशीलता और उर्दू ग़ज़ल की नजाकत जोड़ी।
- ◆मेघाणी के गीतों ने स्वतंत्रता संग्राम और हाशिए के समाज को आवाज़ दी।
- ◆कविता आज भी लोक, संगीत और आधुनिक मंचों पर जीवित है।
اس ویڈیو کے اشعار
चरी करी वળતું તે પાછું ગોવાંરુ જોઈરુંડું કરતું જ બાં બાં ટોળું ઘેટાનું જોઈ
Chari kari valtu te pachhu govaru joiRundun kartu j baa baa tolu ghetanu joi
The cattle return after grazing, and the flock of sheep bleats together.
ફકીરીમાં સપિરો મેં, ભરી આજે મજા કેવી?અમીરેને ફકીરીમાં, મળી આજે રાજા કેવી?
Fakiri ma safiro me, bhari aaje maja kevi?Amire ne fakiri ma, mali aaje raja kevi?
How joyous is the life of a fakir; even the rich find royalty in fakirhood.
અરે રે! ઉડતું ખંજર દિલે ચૂંટી હલાવ્યું મેંઉપડતો થાય શો ત્યારે? હવે ફરિયાદ શાની છે?
Are re! Udtu khanjar dile chunti halavyu meUpadta thay sho tyare? Have farayad shani che?
When the flying dagger pierces the heart, what is the use of complaint now?
આગે કદમ! આગે કદમ! આગે કદમ!ચારોઃ ફનાના પંથ પર આગે કદમ!
Aage kadam! Aage kadam! Aage kadam!Charo fana na panth par aage kadam!
March forward on every path, keep moving ahead!
હું તો લે વિણ વીધીશ ભવ-વાટને રે;હરી! આજથી મા સફળ કારણ રે
Hun to le vin vidhish bhav-vatne re;Hari! Aajthi ma safal karan re
O Lord, guide me to success on the path of life from today.
માથે માંડેલ છે માટીની સુંડઘાટેલા હાથમાં થોડી થોડી બંગડી
Mathe mandel chhe matini sundGhatela hathma thodi thodi bangadi
With a clay pot on her head and bangles on her strong hands.
ٹرانسکرپٹ پڑھیں
नमस्कार, सिद्धी जी बात पर आविये, आजे आपने कविता नी एक एवी दुनिया मा जावाना चीये जे साचेज अथ्यन्त उंडी, भावनात्मक, अने एक्दम सम्रुद्ध छे।
आपने वात करी रहा है शास्त्रिय गुझराती कविता नी, अने हाँ, आपने मातर शब्दों नी गोठवन नथी हो, आथो आखी एक संस्कुरुती नो धभकार छे।
स्क्रीम पर देखा तू आ भावया ने एक्दम सिनेमाटिक द्रश्य जुवा, आपने केवी परंपरानी याद आपावेशे, जेनी कदाज उर्दू गजलो के हिंदी चंदो जितली व्यापक चर्चा नथी थै, पण मानो के नव मानो, तेनी उंडाई खरेखर अकल्पनी
आधुनिस्मी सदी मा एक बहुँ मोटो वढंक आवियो, कवीता धीमे-धीमे धार्मिक मर्यादाओं मा ती बहार आवी, अने तेमा आधुनिक लय, आत्मनिरिक्षन, अने सामाजिक चेतना भढवा लागया, अने बस, अही थी जी आधुनिक गुजराती साहित्या नो
कवीताओंनो संगीत में वारसो। तो शरुबाद करिये आपला पहला पढ़ाओ थी। नरमद, आधुनिकता आने प्रकुरूती। नरमदाशंकर लालशंकर दवे, जेमने आपने बद्धा बहुँ प्रेम थी नरमद कही आज। तमें जूब नरमद खरा आर्थमा आध�
जरा एमनी आप अंक्तियो सांबड़ जो।
चरी करी वढ्तू ते पाछु गोवारु जोओ।
रूडू कर्तूज बैं बैं तोडू घेटानु जो।
सांबडवामा कित्लू शांत आने सुन्दर लागेज ने?
एक गोवार घेटा चरावी ने पाछो फरी रहे हो छे।
आज एवी सरण और आबेहूप कल्पनाओं हती,
जने भविशयना लेखोको मते एक एकदम मजबूत जमीन तयार करी आपी।
हाँए आगल वदिये आपना बीजा विभाग तरफ, कलापी।
राजवी उदासिन्ता अने नजाकत।
अही तमने कविता मा एक अलगज अने घीरू सौंदर्य जोवा मड़शे।
लाठी न युवान राजवी सूर सीजी तक्त सीजी गोहिल।
इतलिके आपना सौउन प्रीय कलापी।
इमनी कविता नो स्वर्च अने एकदम अंगत और उंडान वालो थो।
विचार करो, एक राजवी होगा छता, इमने एक राजवी ठाट माथ बाजू पर मुखी ने, पोतानी सम्वेदन शीलता ने पूरे-पूरी स्वीकारी लिदी।
इमने पर्शियन और उर्दु घजलों ने नजाकत, प्रतीको और अधूरी जंखना ने गुजराती मा एवी रिथे उतारी के ते वो गुजरात ना सौउथी प्रियर रोमान्टिक कवी बनी गया।
इमनी रचनाओं जाने कोई सिनेवाटिक स्वपन जैवी जै, जया विरह और पीड़ा एक कड़ा बनी जाये जाये।
एक ज़्यांपल तरीके आप अंग्तियों जूवों।
फकीरी मां सखीरी मैं, भरी आजे मजा केवी.. अमीरी ने फकीरी मां, मडी आजे रजा केवी।
अद्भूत, एक राजवी मां टे अमीरी छोडिनें फकीरी मां जे आनंद ने स्वतंत्रता मडी उने, तेना आएहसास खरेखर रदे स्पर्शी चे।
आमाटर कविता नथी, पण एक बहुँ मोटी आध्यात्मिक फिलसुफी छे। आने आशेर तो साव सिद्धो रदे माझ उतरी जाये हो छे। अरेरे, उर्दू खनजर दीले जूटी हलावियू मैं, उपर तो हाथ शो त्यारे हवे फर्याद शानी छे। जारे पोता
को माहोल बदलाई जाशे। वाध छे मेघानी, माटी नो आवाज,
हिम्मत औने क्रांती न कवी। राजवी दर्बारों अने उदासींता
माथी बहार आवी ने, हवे सिद्धा जमीन पर आवी। महात्मा गांधी
ये जवेरचन मेघानी ने राश्टिया शायर न बिरुद आपियो थू। अने शा माठे न आपे।
इम्ने सवराष्टना खोवाई ज़यता लोक साहितय मा नवो जीव पूरियो। अने आजादी
नी लड़त वकहते तो एवा क्रांतिकारी गीतो लखया, जणे आखा देश मा आग लगावी दीती। जराज जुस्सो अनुभवो। आगे कदम, आगे कदम, आगे कदम यारो। फनाना पंथ पर आगे कदम। आकोई सामानीय कविता नथी भाई। आएक हाकल हती। मेघ
दर्या वगर, भाई विना, जीवन ना कठीन रस्ताओं पर चालवानी आवाद एक अद्भूत नैतिक हिम्मत बतावेचा। पर एक वाद खास नोंद्वा जेवीचा। मेघहनी मातर राश्ट्रवाद पूर्ता सिमित नों था। इमनी पासे समादना छेवालाना वर्ग �
माथे मांडेल छे माटी नी सुन्डली, घाटीला हाथ मा थोड़ी थोड़ी बंगडी. सामधवा मा केट्लू सादू लागे छे, पर आमा एक काम करती सांताल जाती नी स्ट्रीना सौंदर्य अने तेनी गरीमानू एकदम आबेहूब वर्णन छे। आनाना शब्दों मा सा
सौराश्टना परमपरागड डाइरा होई, आधुनिक सुगम संगीत होई, के बच्ची आजना नवा मुशायराओ औने सिनेमा। कलापी औने मेगाणी नी पंक्तीयों, आजे पण कलाकारों औने श्रोताओं वच्चे एक जीवन सबन बान थे छे। आ मातरम म्यूजियम म
आशा छे के आजना विशलेशन ती शास्त्रिय गुझरादी कविता न आ खजानाने वधू सारी रीते समझवामा मजा आवी आशे। फरी मलीशो।
